Posts

राम नाम कैसे जपें?

🌼 राम नाम कैसे जपें? सही विधि, नियम और आध्यात्मिक लाभ 🌿 — जब जीवन में सब रास्ते बंद लगते हैं, मन बेचैन हो जाता है और भीतर शांति नहीं मिलती… तब एक ही नाम ऐसा है जो तुरंत दिल को सहारा देता है — राम नाम। कहा जाता है कि केवल “राम” का स्मरण ही मन को स्थिर, शांत और शक्तिशाली बना देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है —  राम नाम जपने की सही विधि क्या है? आज हम इसी रहस्य को सरल और गहराई से समझेंगे। 🕉️ राम नाम जप क्या है? (Simple Explanation) राम नाम जप का अर्थ है प्रेम, श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का नाम बार-बार स्मरण करना। यह केवल शब्द बोलना नहीं है, बल्कि अपने मन को भगवान में लगाना है। सनातन परंपरा में माना जाता है कि भगवान श्री राम का नाम स्वयं भगवान का स्वरूप है। 📖 शास्त्रों में राम नाम का महत्व (Scriptural Reference) भक्ति ग्रंथ रामचरितमानस में तुलसीदास जी कहते हैं कि कलियुग में केवल नाम जप ही सबसे सरल और प्रभावी साधना है। राम नाम को “तारक मंत्र” कहा गया है — यानी जो जीवन के दुखों से पार लगा दे। 🕉️ जप के लिए चौपाई (राम नाम जप मंत्र) सबसे सरल और शक्तिशाली चौपाई रामचरितमानस से 👇...

क्या सच में भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया? कथा, रहस्य और आध्यात्मिक संदेश।

Image
 कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत क्यों उठाया? 🌼 भावनात्मक परिचय जब भी हम भक्ति और भगवान की कृपा की बात करते हैं, तो एक दिव्य घटना हमेशा याद आती है — भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाना। यह केवल एक चमत्कार की कहानी नहीं है, बल्कि विश्वास, संरक्षण और सच्ची भक्ति का गहरा संदेश है। आज भी यह प्रश्न लोगों के मन में आता है — क्या वास्तव में भगवान कृष्ण ने पर्वत उठाया था? और अगर हाँ, तो इसका आध्यात्मिक अर्थ क्या है? 🌿 गोवर्धन लीला क्या है? वृंदावन में हर वर्ष लोग वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। लेकिन बालक कृष्ण ने समझाया कि हमें प्रकृति और गोवर्धन पर्वत का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वही हमें जीवन देता है — घास, जल और संरक्षण। जब इंद्र को यह बात पता चली तो वे क्रोधित हो गए और उन्होंने भयंकर वर्षा और तूफान भेज दिया। पूरा वृंदावन संकट में आ गया। तब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी लोगों, पशुओं और भक्तों को सात दिन तक आश्रय दिया। 📖 शास्त्रों में इसका संदर्भ यह लीला श्रीमद भागवत पुराण में वर्णित है और इसे भगवान की दिव्य शक्ति और करुणा का प्रतीक माना जाता है। यह ...

क्या भगवान् सच में है?या केवल कल्पनामात्र?

  🌼 क्या भगवान सच में हैं — या केवल कल्पना? (एक सच्ची जिज्ञासा का शांत और गहरा उत्तर) — मन का सबसे पुराना प्रश्न कभी न कभी यह प्रश्न हर इंसान के मन में आता है — क्या सच में भगवान हैं? जब जीवन में दुख आता है, जब कोई चमत्कार सा अनुभव होता है, या जब मन अकेला महसूस करता है — तब यह सवाल और गहरा हो जाता है। यह केवल दर्शन का प्रश्न नहीं है, यह हमारे अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है। और सच कहें तो — यह प्रश्न उठना ही आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है। 🪔 भगवान का सरल अर्थ क्या है? भगवान कोई केवल मूर्ति या कल्पना नहीं, बल्कि वह चेतना है जो इस पूरे ब्रह्मांड को चलाती है। जिस शक्ति से सूरज उगता है, जिससे हृदय धड़कता है, जिससे जीवन चलता है — वही परमात्मा है। सनातन दृष्टि में भगवान को अनुभव किया जाता है, सिर्फ तर्क से नहीं समझा जाता।  •  शास्त्र क्या कहते हैं:- हमारे सभी ग्रंथ — वेद, उपनिषद, पुराण — एक ही सत्य बताते हैं। सबसे स्पष्ट उत्तर मिलता है भगवद गीता में। करीब 5000 वर्ष पहले भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन से कहा —  “मैं इस सृष्टि का कारण भी हूं और आधार भी।” गीता अध्य...

विष्णु सहस्रनाम के चमत्कारी लाभ | कैसे बदलता है जीवन और मन को देता है शांति

🌼 कैसे जीवन बदल देता है विष्णु सहस्रनाम का जप? कभी-कभी जीवन में सब कुछ होते हुए भी मन बेचैन रहता है। दौड़, चिंता, असुरक्षा — जैसे मन को कहीं ठहराव ही नहीं मिलता। ऐसे समय में हमारे ऋषियों ने एक ऐसा दिव्य मार्ग दिया है जो मन को शांति, जीवन को दिशा और आत्मा को भगवान से जोड़ देता है — विष्णु सहस्रनाम। यह केवल नामों का पाठ नहीं, बल्कि ईश्वर की ऊर्जा से जुड़ने का अनुभव है। 🪔 विष्णु सहस्रनाम क्या है? विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के 1000 दिव्य नामों का स्तोत्र है। हर नाम भगवान के एक गुण, शक्ति और स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। इसका नियमित जप करने से मन धीरे-धीरे शांत, स्थिर और सकारात्मक हो जाता है।  📜 शास्त्रीय संदर्भ महाभारत में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया कि 👉 संसार के दुखों से मुक्ति पाने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय विष्णु सहस्रनाम का जप है। यह स्तोत्र वेदों का सार माना जाता है।  🕉️ कुछ महत्वपूर्ण श्लोक ✨ शांति देने वाला श्लोक शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् । विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ॥ 👉 अर्थ: भगवान विष्णु शांत स्वरूप हैं, जो पूरे संसार का आधार हैं...

Who is Deva of Muladhar chakra?

 Who is Deva of the Muladhar chakra? Deity Ganesha is the supreme of Muladhar chakra. Its base sound is Lam. It's colour is red. This chakra is supposed to be power house of energy. When Muladhar chakra get activated several dimensions opens up for the person . After activation one’s sexual activity get controlled. Person becomes optimistic to know beyond physicality. There is much chances of self realisation because when Muladhar chakra get activated respectively, all chakras get activated. For this immense Sadhna requires. Only then it can happen. Worship deity Ganesha. Jai Ganesh 🙏🌹🏵️

क्या भगवान के बिना जीवन है?

      क्या भगवान के बिना जीवन है? ईश्वर के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। बिना भगवान का मतलब आत्मा के बिना' भगवान, दूसरे शब्दों में देवता इस ब्रह्मांड में व्यापक और सर्वव्यापी रूप है। मुख्य बात तो यह है ,की हमारा अस्तित्व ही नहीं रहेगा। क्योंकि दिव्य ऊर्जा जो हमारे शरीर में निवास करता है । वह और कोई नहीं चेतना स्वरूप भगवान ही है। अगर भगवान के लिए भक्ति  हमारे शरीर में नहीं है तो हम पशु बन जाएंगे, पशु जैसा व्यवहार करेंगे। हमारी नैतिकता पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी, हम राक्षस की तरह व्यवहार करना शुरू कर देंगे। प्यार, करुणा, चरित्र, गायब हो जाएगा। हम अपने मन के, तथाकथित  इन्द्रियों के भी दास होंगे। * हम क्रोध, काम, घृणा, हिंसा आदि से भरे रहेंगे। अगर ये चीजें हम में रहती हैं, तो विनाश की ओर एक कदम बढ़ जाएगा। इसीलिए अध्यात्म और ईश्वर है ,हमारे जीवन में ,जो हमे , नैतिकता और चेतना को दृढ़ करने में सहायता करते है। देवता परम रूप हैं, जो हममें निवास करते हैं। और हमारे तन को प्रकाशित करते हैं ,जिससे यह अंतिम क्षण तक अस्तित्व में रहता है। सर्वोच्च देवता आशीर्वाद देते ह...

Why Deity Krishna not killed Bhishma pitamah?

 Why Deity Krishna not killed Bhishma pitamah? We know deity Krishna is supreme deity or also called as Leela Purushottam.  When Arjun and Duryodhan went to Dwarka to meet Sri Krishna. 🙏  After asking for Mahabharat war ,Arjun first elected Krishna for his side because he went and sighted first, as well. Krishna also told Arjun ,that I am not going to fight and will not hold weapons. Inspite of that, Arjun elected. While Duryodhan bestowed with Narayani Army and he was extremely crazy for his numbers of army. When Mahabharata war was going on ,and Arjuna shows incapability to fight with Bhishma. Krishna became fierceful and gone ahead to kill Bhishma . Because he don't to want to see victory of Adharma or evil. So that's why. Bhishma also determined that ,I will force Krishna to hold weapon. Hence to fulfill Bhishma 's determination , Krishna break his own limitations. After that Arjun prepared to fight with Bhishma,that's why Krishna not killed Bhishma. Another reason...